Akshaya Tritiya

Akshaya Tritiya

Description:Akshaya Tritiya is one of the most important days in Hindu calendar. It is observed on Shukla Paksha Tritiya i.e. the third day during bright half of Vaishakha lunar month in Hindu calendar. According to Hindu scriptures and Purana(s), Satya Yuga ended and Treta Yuga began on the day of Akshaya Tritiya. Hence, Akshaya Tritiya is Yugadi Tithi and the day has great religious significance for most Hindu families. Lord Vishnu, being the preserver of whole creation, is worshipped on Akshaya Tritiya which is a Yugadi Tithi. As the day has been blessed by Lord Vishnu, the day is considered very significant to worship and please Lakshminarayana form of Lord Vishnu. Lakshminarayana is the manifestation of Lord Vishnu in which Lord Vishnu is worshipped along with His consort Goddess Lakshmi. Devotees of Lord Vishnu observe a day long fast on the significant day of Akshaya Tritiya. As per Vratraj, on the day of Akshaya Tritiya Lord Vishnu along with Goddess Lakshmi should be worshipped ritualistically with all necessary Puja steps including flowers, Dhoop and various ointments. The day of Akshaya Tritiya is also given special significance in Vedic Astrology. It is believed that the day doesn’t need any Muhurat to start any auspicious work. Many Mangalika (माङ्गलिक) work e.g. marriage ceremony, house warming ceremony, purchasing of new clothes and jewelry, purchasing property, buying new vehicle and motor bike etc. are performed on Akshaya Tritiya day.

Also Called : Akha Teej, Akshaya Teej
Significance : As per Hindu time keeping, the time has been divided into four Yuga. All four Yuga are cyclic and these are known as Satya Yuga, Treta Yuga, Dwapar Yuga and Kali Yuga respectively.
Deity(s): Lord Vishnu, Goddess Lakshmi
Key Rituals : Akshaya Tritiya Puja, worshipping Lakshminarayana
Mythological Figures : Lord Parashurama Observances :

  • day long fasting dedicated to Lord Vishnu
  • worshipping Lakshminarayana form of Lord Vishnu
  • purchasing gold in form of jewelry and coins
  • conducing marriages and house warming ceremony
  • buying new vehicle
  • taking bath in Ganges and other sacred places
  • performing Tarpan for deceased ancestors
  • offering charity to Brahmins or those in need
  • conducting Hawan

AKSHAY TRITIYA Vrat Vidhi
भविष्य पुराण के अनुसार वैशाख पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। अक्षय का शाब्दिक अर्थ कभी भी नष्ट न होने वाला है। वैसे तो साल की सभी तृतीया तिथि शुभ होती हैं, लेकिन वैशाख महीने की तृतीया सभी कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। अक्षय तृतीया के दिन किसी नए कार्य की शुरूआत करना अच्छा माना जाता है।

भविष्यपुराण के अनुसार अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya According to Bhavishya Puran in Hindi) 
भविष्यपुराण के अनुसार वैशाख पक्ष की तृतीया के दिन ही सतयुग तथा त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी। भगवान विष्णु ने अक्षय तृतीया तिथि को हयग्रीव तथा परशुराम के रूप में अवतार लिया था। इसी तिथि से हिन्दू तीर्थ स्थल बद्रीनाथ के दरवाजे खोले जाते हैं। वृन्दावन के बांके बिहारी मंदिर में चरण दर्शन, अक्षय तृतीया के दिन ही किए जाते हैं। ब्रह्मा पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इसी दिन हुआ था।

पद्म पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya According to Padma Puran)
पद्म पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया के दोपहर का समय सबसे शुभ माना जाता है। इसी दिन महाभारत युद्ध की समाप्ति तथा द्वापर युग प्रारम्भ हुआ था।

अक्षय तृतीया कथा (Akshaya Tritiya Story or Katha in Hindi) भविष्य पुराण के अनुसार, शाकल नगर में धर्मदास नामक वैश्य रहता था। धर्मदास, स्वभाव से बहुत ही आध्यात्मिक था, जो देवताओं व ब्राह्मणों का पूजन किया करता था। एक दिन धर्मदास ने अक्षय तृतीया के बारे में सुना कि ‘वैशाख शुक्ल की तृतीया तिथि को देवताओं का पूजन व ब्राह्मणों को दिया हुआ दान अक्षय हो जाता है।’ यह सुनकर वैश्य ने अक्षय तृतीया के दिन गंगा स्नान कर, अपने पितरों का तर्पण किया। स्नान के बाद घर जाकर देवी- देवताओं का विधि- विधान से पूजन कर, ब्राह्मणों को अन्न, सत्तू, दही, चना, गेहूं, गुड़, ईख, खांड आदि का श्रद्धा- भाव से दान किया। धर्मदास की पत्नी, उसे बार- बार मना करती लेकिन धर्मदास अक्षय तृतीया को दान जरूर करता था। कुछ समय बाद धर्मदास की मृत्यु हो गई। कुछ समय पश्चात उसका पुनर्जन्म द्वारका की कुशावती नगर के राजा के रूप में हुआ। कहा जाता है कि अपने पूर्व जन्म में किए गए दान के प्रभाव से ही धर्मदास को राजयोग मिला।

अक्षय तृतीया का दिन

  • इस दिन समुद्र या गंगा स्नान करना चाहिए।
  • प्रातः पंखा, चावल, नमक, घी, शक्कर, साग, इमली, फल तथा वस्त्र का दान करके ब्राह्मणों को दक्षिणा भी देनी चाहिए।
  • ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।
  • इस दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए।
  • आज के दिन नवीन वस्त्र, शस्त्र, आभूषणादि बनवाना या धारण करना चाहिए।
  • नवीन स्थान, संस्था, समाज आदि की स्थापना या उद्घाटन भी आज ही करना चाहिए।

शास्त्रों में अक्षय तृतीया

  • इस दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ माना जाता है।
  • इसी दिन श्री बद्रीनारायण के पट खुलते हैं।
  • नर-नारायण ने भी इसी दिन अवतार लिया था।
  • श्री परशुरामजी का अवतरण भी इसी दिन हुआ था।
  • हयग्रीव का अवतार भी इसी दिन हुआ था।
  • वृंदावन के श्री बाँकेबिहारीजी के मंदिर में केवल इसी दिन श्रीविग्रह के चरण-दर्शन होते हैं अन्यथा पूरे वर्ष वस्त्रों से ढँके रहते हैं।

अक्षय तृतीया का माहात्म्य

  • जो मनुष्य इस दिन गंगा स्नान करता है, उसे पापों से मुक्ति मिलती है।
  • इस दिन परशुरामजी की पूजा करके उन्हें अर्घ्य देने का बड़ा माहात्म्य माना गया है।
  • शुभ व पूजनीय कार्य इस दिन होते हैं, जिनसे प्राणियों (मनुष्यों) का जीवन धन्य हो जाता है।
  • श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि यह तिथि परम पुण्यमय है। इस दिन दोपहर से पूर्व स्नान, जप, तप, होम, स्वाध्याय, पितृ-तर्पण तथा दान आदि करने वाला महाभाग अक्षय पुण्यफल का भागी होता है।
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