Akshaya Tritiya

Akshaya Tritiya

Description:Akshaya Tritiya is one of the most important days in Hindu calendar. It is observed on Shukla Paksha Read more

Ram Navmi

Ram Navmi

Description: Rama Navami is observed as the birth anniversary of Lord Rama. It is very significant day and devotees of Lord Rama keep a day long fast and worship Him with all rituals. Lord Rama is considered the seventh incarnation of Lord Vishnu.

At some places, mainly in North India, the day coincides with the last day of Chaitra Navratri. Many people conduct Homa on Rama Navami and conclude nine days festivities of Chaitra Navratri. Hence Navratri Puja during Chaitra month is also known as Rama Navratri.

Rama Navami Origin | Significance Rama Navami is observed since the Era of Lord Rama. Hindus are celebrating Rama Navami since ages and no historic records are kept to count the exact years of the birth anniversary of Lord Rama. However, as per Vedic time keeping, Lord Rama was born about a million years ago during Treta Yuga.

Also Called : Rama Navmi
Significance : birth anniversary of Lord Rama
Deity(s): Lord Rama
Key Rituals : Rama Navami Puja
Mythological Figures: Lord Rama, Mata Kaushalya, King Dasharatha, Devi Sita, Bharata, Lakshmana, Shatrughna, Hanuman

Observances :

  • a day long fast
  • worshipping Lord Rama
  • listen or narrating the epic Ramayana or Nama Ramayanam
  • performing ceremonial wedding of Lord Rama and Goddess Sita
  • conducting Rama Navami procession
  • conducting Hawan i.e. Homa before breaking the fast on the next day

राम नवमी कथा 
पौराणिक कथानुसार राम नवमी के ही दिन त्रेता युग में महाराज दशरथ के घर विष्णु जी के अवतार भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म रावण के अंत के लिए हुआ था। श्रीराम को लोग उनके सुशासन, मर्यादित व्यवहार और सदाचार युक्त शासन के लिए याद करते हैं। उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में राम नवमी का त्यौहार पूरे हर्षोत्पादक के साथ मनाया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या आते हैं और प्रातःकाल सरयू नदी में स्नान कर भगवान के मंदिर में जाकर भक्तिपूर्वक उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। राम नवमी के दिन जगह-जगह रामायण का पाठ होता है। कई जगह भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और भक्त हनुमान की रथयात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

श्री राम नवमी पूजा विधि 
नारद पुराण के अनुसार राम नवमी के दिन भक्तों को उपवास करना चाहिए। श्री राम जी की पूजा-अर्चना करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए और गौ, भूमि, वस्त्र आदि का दान देना चाहिए। इसके बाद भगवान श्रीराम की पूजा संपन्न करनी चाहिए।

Holika Dahan

Holika Dahan

Description: Holika Dahan is one of the most significant festivals among Hindus. Holika Dahan is also known as Chhoti Holi. Holi celebrations start a night before Holi with Holika bonfire, when people worship Holika and burn her in huge bonfire. The bonfire is reminder of the symbolic victory of good over evil.
Also Called : Chhoti Holi, Jalanewali Holi
Significance : celebrating victory of good over evil
Deity(s): Holika, Prahlada
Key Rituals : Holi Puja
Mythological Figures : Lord Narasimha, Lord Vishnu, Prahlada, Hiranyakashipu, Holika
Observances : Holika Puja
burning Holika effigy in the evening or late night
roasting green cereals in Holika bonfire
Legends : Holika and Prahlada – There are various Holi legends. The most famous one is about Prahlada who was ardent devotee of Lord Vishnu.

Prahlada, the son of demon Hiranyakashipu and his wife Kayadhu, was born and brought up under guidance of sage Narada when Hiranyakashipu was busy in pleasing Lord Brahma to gain immortality.

Hiranyakashipu, the father of Prahlada, was enemy of Lord Vishnu. He was highly against of his son being devotee of Lord Vishnu. When Prahlada refused to obey Hiranyakashipu, Hiranyakashipu asked his sister Holika, a lady demon, to kill Prahlada. Holika had divine shawl, gifted by Lord Brahma, to protect her from fire. Holika made a plan to kill Prahlada in a huge bonfire. Holika lured Prahlada in bonfire but due to grace of Lord Vishnu, divine shawl protected Prahlada instead of Holika.

As folklore goes when the fire was lit Prahlada started chanting the name of Lord Vishnu. When Lord Vishnu found his devotee in danger he summoned a gust of wind to blow the shawl off to Holika and on to his devotee Prahlada. Hence demoness Holika was burned to ashes in huge bonfire and Prahlada was unhurt due to grace of Lord Vishnu and divine shawl.

Later, when Hiranyakashipu didn’t stop his attempts to kill Prahlada, Lord Vishnu appeared on the Earth in form of Lord Narasimha to protect Prahlada and to kill demon Hiranyakashipu.

Holi festival got its name from the legend of Holika and Holi bonfire is known as Holika Dahan.

होली है खुशियों का त्यौहार 
बसंत ऋतु के आते ही राग, संगीत और रंग का त्यौहार होली, खुशियों और भाईचारे के सन्देश के साथ अपने रंग-बिरंगी आंचल में सबको ढंक लेती है। हिन्दुओं का यह प्रमुख त्यौहार होली हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस पवित्र त्यौहार के सन्दर्भ में यूं तो कई कथाएं इतिहासों और पुराणों में वर्णित है, परन्तु हिन्दू धर्म ग्रन्थ विष्णु पुराण में वर्णित प्रहलाद और होलिका की कथा सबसे ज्यादा मान्य और प्रचलित है।

प्रहलाद और होलिका की कथा 
नारद पुराण की एक कथानुसार श्रीहरि विष्णु के परम भक्त प्रहलाद का पिता दैत्यराज हिरण्यकश्यप नास्तिक और निरंकुश था। उसने अपने पुत्र से विष्णु भक्ति छोड़ने के लिए कहा परन्तु अथक प्रयासों के बाद भी वह सफल नहीं हो सका। तदुपरांत हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे की भक्ति को देखते हुए उसे मरवा देने का निर्णय लिया। लेकिन अपने पुत्र को मारने की उसकी कई कोशिशें विफल रहीं इसके बाद उसने यह कार्य अपनी बहन होलिका को सौंपा। होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह कभी जल नहीं सकती। होलिका अपने भाई के कहने पर प्रहलाद को लेकर जलती चिता पर बैठ गई। लेकिन इस आग में प्रहलाद तो जला नहीं पर होलिका जल गई। तभी से इस त्यौहार के मनाने की प्रथा चल पड़ी है।

होली – रंगों का त्यौहार 
होली के अवसर पर सतरंगी रंगों के साथ सात सुरों का अनोखा संगम देखने को मिलता है। इस दिन रंगों से खेलते समय मन में खुशी, प्यार और उमंग छा जाते हैं और अपने आप तन मन नृत्य करने को मचल जाता है। दुश्मनी को दोस्ती के रंग में रंगने वाला त्यौहार होली देश का एकमात्र ऐसा त्यौहार है, जिसे देश के सभी नागरिक उन्मुक्त भाव और सौहार्दपूर्ण तरीके से मानते हैं। इस त्यौहार में भाषा, जाति और धर्म का सभी दीवारें गिर जाती है, जिससे समाज को मानवता का अमूल्य सन्देश मिलता है। रंगों के त्यौहार होली के दिन लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हैं और खुशी मनाते हैं। संपूर्ण भारतवर्ष में यह त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन ब्रज और मथुरा जैसे क्षेत्रों में इसकी छठा अनुपम होती है। हिन्दू धर्मानुसार होली के दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन होता है और इस दिन पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि
नारद पुराण के अनुसार होलिका दहन के अगले दिन (रंग वाली होली के दिन) प्रात: काल उठकर आवश्यक नित्यक्रिया से निवृत्त होकर पितरों और देवताओं के लिए तर्पण-पूजन करना चाहिए। साथ ही सभी दोषों की शांति के लिए होलिका की विभूति की वंदना कर उसे अपने शरीर में लगाना चाहिए। घर के आंगन को गोबर से लीपकर उसमें एक चौकोर मण्डल बनाना चाहिए और उसे रंगीन अक्षतों से अलंकृत कर उसमें पूजा-अर्चना करनी चाहिए। ऐसा करने से आयु की वृ्द्धि, आरोग्य की प्राप्ति तथा समस्त इच्छाओं की पूर्ति होती है।

Maha Shivaratri

Maha Shivaratri

Description:

Maha Shivaratri is one of the most significant festivals among Hindus. Maha Shivaratri is also known as Shivratri or Read more

Vasant Panchami

Vasant Panchami

Description:Description : The day of Vasant Panchami is dedicated to Goddess Saraswati, the Hindu Goddess of Read more

Makar Sankranti

मकर संक्रांति व्रत विधि हिन्दू धर्म के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना “मकर-संक्रांति” कहलाता है। मकर-संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। इस दिन व्रत और दान (विशेषकर तिल के दान का) का काफी महत्व होता है।  Read more