Headache

Headache :- Careful use of Magnetic therapy give excellent result for management of headache: (a) if due to indigestion, General Application Method No. 1 and Magnetised Water to drink. (b) If due to fevers, General Application Method No. 1 and Magnetised Water tow hourly. (c) If due to ear trouble South Pole of a strong magnet to be applied under right palm for 10 to 15 minutes and North Pole of a medium strength magnet near the affected ear. (d) If due to Eye trouble South Pole of a strong magnet should be applied under the right palm and North Pole of a low power magnet on each eye for five minutes in all kind of functional disorders. (e) If due to mental strain or sorrow General Application Method No. 1 for 20 minutes & Magnetised Water. (f) If due to toxaemia of Jaundice General Application Method No. 1; due to Nephritis, General Application Method No. 5; due to Sinusitis small magnets on nose; due to Tonsillitis General Application Method No. 1 and local treatment on throat by crescent type magnets. (g)

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DEVI CHITRALEKHA JI

भारत भूमि, अनन्त कालों से अपनी पुण्यमयी, तपोमयी और महान विभूतियों की जन्मदायी रही है. युगों युगों से जब जब धरती पर धर्म की हानि हुई है. तब तब प्रभू की प्रेरणा से कोई न कोई दिव्य आत्मा भू-लोक में जन्म लेकर समाज को, विश्व को, भक्ति व ज्ञान की ज्योति जलाती है. जिससे विश्व प्रलाशवान भक्ति के पथ पर आगे बढ़ता है. ऐसे ही हैं एक दिव्य ज्योति देवी चित्रलेखा जी. जिस उम्र में बच्चे बोलने मात्र के लिये माँ-बाप पर निर्भर रहते हैं ऐसी कम उम्र में देवी जी कई सौ श्रीमद् भागवत कथाओं का सफ़ल आयोजन कर चुकी हैं.

जन्म :-
देवी चित्रलेखा जी का प्राक्ट्य 19 जनवरी, 1997 में ब्राह्मण परिवार में गौरपार्षद भक्त प्रवर पंडित टीकाराम शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती चमेली देवी शर्मा के पवित्र कोख (गर्भ) से भारत में हरियाणा राज्य के पलवल जिले के अन्तर्गत पावन ग्राम खाम्बी में हुआ. उक्त खाम्बी ग्राम (आदिवृन्दावन) ब्रज चौरासी कोस की परिधि में ही आता है. इस कारण देवी जी को ब्रजभूमि के दिव्य संस्कार स्वतः ही प्राप्त हो गये. जन्म के उपरान्त इस आलौकिक बालिका को देखने हेतु अनेक संत, महात्मा, पंडित दम्पति के घर पधारे और भविष्यवाणी की कि यह अल्प व्यस्क चित्रलेखा जी एक दिन देश-विदेश के बड़े-बड़े विद्वानों को चकित कर देंगी.

दीक्षा:-
देवी चित्रलेखा जी को मात्र चार साल की आयु में एक बंगाली संत श्री श्री गिरधारी बाबा महाराज से दिक्षा संस्कार हो गया. इनके परिवार में इनके माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी पहले से ही भक्त रहे हैं.